कुछ पूरे कुछ अधूरे लफ्जों का खेल है जिंदगी, आसान न समझना इसे लफ़्जों का खेल है जिंदगी। जब से भोपाल में कोरोना के केस बढ़ने लगे थे तभी से ये अंदेशा था कि खुदा न ख़्वास्ता कोई पत्रकार इस महामारी की चपेट में नहीं आ जाये। और कल बंसल न्यूज के एक सीनियर कॉरेसपॉंडेंट जुगल शर्मा के कोरोना  पोसिटिव होने की खबर आ गई। इसके बाद से ही मीडिया जगत में हड़कंप के हालात हैं। शुक्र हैंकि जुगल के सारे पैरामीटर नार्मल हैं। ये बात और है कि सरकार पोसिटिव मरीज का इलाज मुफ्त करा रही है।इस पत्रकार का इलाज भी  हो जाएगा। लेकिन सवाल ये उठता है कि हमारे पीएम साब शुरू से ही कह रहे हैं कि कोरोना से जंग लड़ रहे पुलिस, डॉक्टर , नर्स और सफाई वालो के साथ ही पत्रकारों का ताली बजाकर स्वागत कीजिये। य लोग भी अपनी जान पे खेल के खबरें इकठ्ठी करते हैं। बाकी सरकार ने कोरोना के अपने फील्ड स्टाफ को 50 लाख का बीमा कवर दे दिया है। पत्रकारों की रिस्क को नजरअंदाज किया गया। इन्हें कोई बीमा कवर नहीं दिया गया है। मीडिया जगत में इस नाइंसाफी को लेकर चचार्ओं के दौर चल पड़े हैं। अपने ख्याल से तो खां सरकार को पत्रकारों की अनदेखी नहीं करना चाहिए।