हमारी जिंदगी तो मुक्तसर सी इक कहानी थी, भला हो मौत का जिसने बना रक्खा है अफसाना। नया साल सीहोर के पत्रकार जगत में गम और अफसोस की खबरें लेकर आया। एक हफ्ते में यहां के दो जाने माने पत्रकार फानी दुनिया को अलविदा कह गए। 7 जनवरी को सीहोर के हरदिल अजीज पत्रकार चंद्रकांत दासवानी उर्फ बल्लू भैया का इंतकाल हुआ। बल्लू भैया कोई पचास बरस के होंगे। उन्हें जब मौत ने घेरा तब वो मुक्तिधाम में अपने किसी परिचित की चिता पर पंचलकड़ी की क्रिया कर रहे थे। वहां अचानक बेहोश होकर गिरे तो फिर नहीं उठे। उन्हें गंभीर दिल का दौरा पड़ा था। प्रभात किरण सहित कई अखबारों मे रहे चंद्रकांत दासवानी सीहोर एक्सप्रेस न्यूज पोर्टल चलाते थे। सीहोर के पत्रकार उनकी मौत के  गम को अभी भुला भी नहीं पाए थे कि कल शहर के बुजुर्ग सहाफी सरूप सिंह राठौर (68) के इंतकाल की खबर आई। डायबिटीज के चलते कार्डियक अरेस्ट ने सरूपजी को हमसे छीन लिया। देशबंधु में वे वर्षों सीहोर का ब्यूरो देखते रहे। शुरुआती दौर में आप अंबादत्त भारती के साथ जागरण में भी रहे। निहायत कमिटेड राठौर साहब समाचार वाचक नामक अपना अखबार भी निकाला करते थे। वे सीहोर प्रेस क्लब के अध्यक्ष भी रहे। शहर के विकास के लिए इन दोनों पत्रकारों ने बहुत कुछ किया। दोनों मरहूम सहाफियों को खिराजे अकीदत।