दिल्ली महिला आयोग ने सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) को नोटिस भेजा है. उनसे बच्चों के एडॉप्शन के बारे में कुछ जानकारी मांगी है. आयोग ने जयपुर स्थित जे के लोन हॉस्पिटल में एक लावारिस बच्ची की मौत के बारे में मीडिया की रिपोर्ट पर खुद संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया है.

मीडिया रिपोर्ट में यह बताया गया था कि करीब महीने भर पहले राजस्थान के नागौर में एक मासूम बच्ची लावारिस पाई गई थी. वह बहुत ही गंभीर अवस्था में थी और उसको इलाज के लिए नागौर के स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. इस बच्ची को एक जोड़े ने गोद लेने के लिए अधिकारियों से संपर्क किया था. सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद जोड़े को इंतजार करने के लिए कह दिया गया था.

मगर इसी बीच बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी. उसको पहले नागौर से जोधपुर और फिर जयपुर में जे के लोन हॉस्पिटल में भर्ती किया गया. जहां उसकी तबीयत काफी खराब हो गई. दंपति ने आयोग को बताया कि बच्ची को गोद लेने की प्रक्रिया में देरी होने की वजह से उसको अच्छा इलाज और देखभाल नहीं मिल पाया, जिसके कारण 8 जुलाई को बच्ची की अस्पताल में मौत हो गई.

आयोग ने इस मामले में चिंता जताई है. आयोग ने कहा कि हालांकि बच्चे को गोद लेने पर उसकी सुरक्षा और सलामती के लिए कुछ जांच प्रक्रिया जरूरी है, मगर गोद लेने के लिए गैरजरूरी प्रक्रियाओं से बचा जाना चाहिए. खासकर की ऐसे मामलों में जहां पर बच्चे को एक अच्छे वातावरण की बहुत ज्यादा आवश्यकता है.

आयोग ने इस मामले में सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी से कुछ सूचना मांगी है. जो कि इस प्रकार से है-

बच्ची को गोद लेने के मामले में प्रक्रिया में देरी होने के क्या कारण रहे?

क्या बच्ची से अस्पताल में CARA, बाल कल्याण समिति, राज्य स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान महिला एवं बाल विकास विभाग से कोई भी बच्ची से मिलने आया? अगर हां, तो उसकी विजिट रिपोर्ट दी जाए.

क्या सम्बंधित अधिकारियों के जरिए बच्ची के स्वास्थ्य की निगरानी रखी जा रही थी? अगर हां तो उसकी रिपोर्ट प्रदान करें.

क्या बच्ची को कोई इंडिविजुअल केयर प्लान दिया गया था? उसका विवरण दें.

गोद लेने के लिए अभी कितने बच्चे उपलब्ध हैं और कितने बच्चों को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित किया गया है?

इन बच्चों का विवरण उम्र, लिंग, राज्य, जिस दिन से वह गोद लेने के लिए उपलब्ध है, बच्चे को गोद लेने की तिथि और उसकी वर्तमान स्थिति इत्यादि की जानकारी.

वर्तमान में CARA के साथ रजिस्टर्ड प्रोस्पेक्टिव अडॉप्टिव पेरेंट्स की जानकारी, उनके वर्तमान राज्य, उम्र, क्या उनकी होम स्टडी रिपोर्ट पूरी हो गयी है, उसकी रिपोर्ट, क्या उनको गोद लेने के लिए स्वीकृति मिल गयी है, क्या उन्होंने बच्चे को गोद ले लिए है? इत्यादि की जानकारी.

CARA के पास रजिस्टर्ड स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी का विवरण, गोद लेने के लिए समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी करने के लिए उनके लिए निगरानी व्यवस्था इत्यादि की जानकारी.

इसके अलावा आयोग ने पूछा है कि अगर किसी मामले में बच्चा किसी ऐसी बीमारी से जूझ रहा है, जिसमें उसे तुरंत पैरेंटल केयर की जरूरत हो या किसी विशेष बच्चे को जल्द गोद लेने के लिए कोई माता-पिता आगे आते हैं तो इसकी प्रक्रिया सरल बनाने के लिए CARA ने क्या कदम उठाये हैं. आयोग ने CARA से 28 जुलाई तक उपरोक्त सूचना प्रदान करने का कहा है.