लोकसभा चुनाव के दौरान नमो टीवी के प्रसारण का मुद्दा संसद में भी उठा है. जिस पर सरकार ने सफाई दी है कि यह चैनल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में लिस्टेड नहीं था. सांसद बालूभाऊ सुरेश नारायण धानोरकर ने 12 जुलाई को सरकार से पूछा था कि क्या नमो टीवी नामक टीवी चैनल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के चैनलों की सूची में सूचीबद्ध है. यदि हां तो इसका ब्यौरा क्या है. यदि नहीं तो इसके क्या कारण हैं. आम चुनाव 2019 के दौरान इसे कैसे शुरू किया गया?

इसका जवाब देते हुए  सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने लोकसभा में 12 जुलाई को बताया कि नमो टीवी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के चैनलों की सूची में सूचीबद्ध नहीं है. क्योंकि यह डीटीएच ऑपरेटरों की ओर से ग्राहकों को दी जाने वाली प्लेटफॉर्म सेवा थी. हालांकि सरकार की तरफ से सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने यह नहीं बताया कि आम चुनाव 2019 के दौरान इसका प्रसारण कैसे शुरू हुआ.

बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान नमो टीवी के रहस्यमय ढंग से प्रसारण पर विपक्ष ने हंगामा किया था. इस चैनल पर पीएम मोदी के भाषण चलने पर राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने सूचना प्रसारण मंत्रालय से सवाल पूछते हुए कहा था कि आखिर नियमों को दरकिनार करके इस चैनल के प्रसारण की अनुमति किस तरह दी गई है. विपक्ष ने इस चैनल को सरकार का प्रॉपेगैंडा मशीन करार दिया था.

उस दौरान डीटीएच ऑपरेटर्स जैसे कि टाटा स्काई, वीडियोकॉन और डिश टीवी ने नमो टीवी को फ्री टू एयर करार दिया. यानी कि इस चैनल को देखने के लिए उपभोक्ताओं को कोई पैसा नहीं देना पड़ रहा था. ये चैनल पूरे देश में दिख रहा था.

बीजेपी उठा रही थी खर्च
विवाद बढ़ने पर चुनाव आयोग ने सूचना प्रसारण मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी  थी. सूचना प्रसारण मंत्रालय के जवाब से विवाद और भी बढ़ गया था. मंत्रालय ने चुनाव आयोग को बताया कि नमो टीवी एक 'विज्ञापन आधारित प्लेटफॉर्म' है और इसका प्रसारण डीटीएच ऑपरेटर्स कर रहे हैं. इस प्रसारण का खर्चा भारतीय जनता पार्टी द्वारा उठाया जा रहा है.