कर्नाटक के सियासी नाटक को भरपूर तरीके से लीडरी सौंपी गई। यहीं संसद से निकलतीं हेमामालिनी के छाते के नीचे फारूक अब्दुल्ला की फोटू बरबस ही ध्यान खींचती है। भोपाल का पूरा ईको सिस्टम तीस साल में खत्म हो गया। इस दौरान हरियाली 75 फीसदी नष्ट कर दी गई। शहर के इस बेतरतीब विस्तार पे पूरा पेज ही भोत जानदार आया है। गुमठी वालों की हक की लड़ाई लड़ रहे सुरेंद्रनाथ सिंह का खून बहाने वाले बयान की खबर की यहां भरपूर फैलान है। बाकी पत्रिका ने खबर को मर्यादा तोड़ने मार तमाम विशेषणों के साथ नहीं लिया। तमाम तरह के फर्जीवाड़े में लिप्त सूबे के आठ आईएफएस अफसरों की विभागीय जांच की सुस्त रफ्तारी पे अशोक गौतम की जानदार खबर आई। अब क्राइम ब्रांच में पोस्टिंग के लिए इम्तहान देना होगा। सतेंद्र सिंह भदौरिया की खबर भेतरीन आई।