नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंत्रियों के संसद की कार्यवाही से गायब रहने पर नाखुशी जाहिर करने के बाद राज्यसभा के सभापति एम.वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को पशुपालन, मत्स्य पालन व डेयरी राज्य मंत्री संजीव कुमार बालियान को हाल में उनका नाम पुकारे जाने के बाद अनुपस्थित रहने को लेकर फटकार लगाई. इस स्थिति की वजह से सरकार को शर्मिदा होना पड़ा.

नायडू ने मंत्री को गलती फिर न दोहराने को लेकर आगाह किया. सभापति ने कहा, 'मंत्रीजी, परसों आपका नाम कार्यसूची में था, लेकिन जब पुकारा गया तो आप मौजूद नहीं थे. कृपया ध्यान रखें कि भविष्य में ऐसा फिर नहीं होना चाहिए.' बालियान ने गैरहाजिर रहने के लिए अफसोस जताया और भरोसा दिया कि ऐसा फिर नहीं होगा.

इसके बाद सदन में शून्यकाल के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए. बिहार के नेताओं ने राज्य में भीषण बाढ़ का मुद्दा उठाया. बाढ़ से करीब एक दर्जन जिले प्रभावित हुए हैं.

संसदीय समितियों के गठन में देरी, नायडू ने पार्टियों से नाम मांगे
राजनीतिक दलों द्वारा संसद की विभिन्न स्थायी समितियों के सदस्यों को नामित न किए जाने से नाराज राज्यसभा के सभापति एम.वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को सभी पार्टियों को जल्द से जल्द संसदीय समितियों के लिए नाम भेजने की अपील की. सभापति ने कहा, 'मुझे कहते हुए खेद है कि रिमाइंडर के बावजूद कुछ पार्टियों को अभी नाम देने हैं. मैं पार्टियों का नाम नहीं लेना चाहता. यह मेरा उद्देश्य नहीं है. मैं सभी राजनीतिक दलों से जल्द से जल्द नाम देने की अपील करता हूं, जिससे कि हम जल्दी से स्थायी समितियों का गठन कर सकें.'

सभापति की यह प्रतिक्रिया तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ'ब्रायन के अनुरोध के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा कि स्थायी समितियों द्वारा बहुत से विधेयकों की उचित तरीके से जांच नहीं की जा रही है, और सरकार ज्यादा से ज्यादा विधेयक मंजूरी के लिए ला रही है.

सदस्य ने कहा कि सरकार ने अगले सप्ताह के लिए कार्य की सूची में नौ से ज्यादा विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, लेकिन इनमें से ज्यादातर की समीक्षा स्थायी समिति द्वारा नहीं की गई है.

ओ'ब्रायन ने कहा, 'स्थायी समितियों का गठन नहीं किया गया है. इन विधेयकों (सरकार द्वारा आगामी सप्ताह के लिए सूचीबद्ध) में से प्रत्येक, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक को छोड़कर किसी की जांच नहीं की गई है.'

उन्होंने कहा, 'श्रीमान, मेरी आप के जरिए सरकार से अपील है कि हम पहले ही बिना जांच के विधेयकों को पारित कर चुके हैं. आगामी सप्ताह के लिए नौ और सूचीबद्ध हैं. इसके मतलब 11 और 8, 19 विधेयक कानून बने के लिए पारित होने जा रहे हैं और कोई संसदीय जांच व स्थायी समिति नहीं है.'