वाशिंगटन: ब्रिटेन ने एक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की कि ईरान ने उसके दो तेल के टैंकर को शुक्रवार को अपने कब्जे में लिया है. साथ ही ब्रिटेन ने ईरान को उनके तेल के टैंकर को न छोड़ने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी है. इससे पहले ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा था कि उन्होंने तेल के दो ऐसे टैंकर को अपने कब्जे में लिया है जिसपर ब्रिटेन का झंड़ा लगा हुआ था. बता दें कि रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की यह कार्रवाई ब्रिटेन की उस कार्रवाई के दो हफ्ते बाद आई है जब ब्रिटेन ने ईरान के टैंकर को कब्जे में लिया था.

Iran seizes 2 UK tankers, claims US official

Read @ANI story | https://t.co/Zv0Nr8oNSw pic.twitter.com/c0mH78dEFr

— ANI Digital (@ani_digital) July 19, 2019

ईरान की तसनीम न्यूड एजेंसी के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार दूसरे वैसेल जो कि एक ब्रिटिश द्वारा ऑपरेट किया जाना वाला जहाज है को कब्जे में नहीं लिया गया है. न्यूज एजेंसी के अनुसार इस जहाज को चेतावनी देकर जाने दिया गया था. गौरतलब है कि ईरान और ब्रिटेन के बीच संबंध समय से खराब चल रहे हैं. पिछले साल ही ब्रिटेन ने ईरान से अनुरोध किया था कि वह यमन में हथियारों की आपूर्ति को बंद करे और अपने प्रभाव का इस्तेमाल संघर्ष को खत्म करने के लिए करे. सऊदी अरब यमन सरकार की हिमायत में और ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों के खिलाफ हवाई हमलों की अगुवाई कर रहा था. संयुक्त राष्ट्र ने पाया था कि ईरान हुती विद्रोहियों को मिसाइल और ड्रोन की आपूर्ति रोकने में विफल रहा है.

एक संयुक्त बयान में ब्रिटेन के विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन और अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री पेनी मोरडउंट ने ईरान से अपने रूख में बदलाव करने का आग्रह किया था.बयान में उन्होंने कहा था कि अगर ईरान वास्तव में यमन में राजनीतिक समाधान चाहता है जैसा उसने सार्वजनिक तौर पर कहा है, तो उसे हथियारों की आपूर्ति रोकनी चाहिए जो संघर्ष को लंबा खींच रही है, क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा रही है और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही है.

इसमें कहा गया था कि हम सवाल करना चाहते हैं कि ईरान ऐसे देश को क्यों धन भेज रहा है जिसके साथ उसके वास्तविक ऐतिहासिक संबंध या हित नहीं है बल्कि इसे अपने प्रभाव का इस्तेमाल संघर्ष को खत्म करने के लिए करना चाहिए जो यमन के लोगों के लिए अच्छा है. इससे पहले ईरान के मुखिया और सबसे बड़े नेता अयातुल्ला अली खुमैनी ने कहा था कि क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर तेहरान का उसके खास दुश्मन अमरीका  और 'दुष्ट' ब्रिटेन से सहयोग करने कोई इरादा नहीं है. ऐसा एक टीवी रिपोर्ट में बताया गया था