यहां अस्पताल के पलंग पे बेसुध हालत में लेटी जिस महिला की तस्वीर को आप देख रहे हैं वो जान्हवी दुबे की है। न्यूज-18 के सीनियर एडिटर और कमिटेड जर्नलिस्ट प्रवीण दुबे की शरीके हयात।  ये जो जिंदगी है न, ये हमें एक लम्हा खुशी का अदा करती है तो दूसरे ही लम्हे में उसका रंग कुछ और होता है। डिंडोरी में जान्हवी के 26 बरस के छोटे भाई जयेंद्र की तबियत कुछ दिनों पहले नासाज होती है। वहां डाक्टर उसके  बुखार को मामूली समझ के इलाज करता है। हालत अचानक बिगड़ती है। घर वाले उसे जबलपुर लेकर पहुंचते हैं। इधर जान्हवी भोपाल से जबलपुर के लिए रवाना होती हैं। वहां मेडिकल कॉलेज में डाक्टर कहते हैं सिर्फ दस परसेंट उम्मीद है। इनका लीवर हेपेटाइटिस बी से खत्म हो चुका है। घर वालों की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकलता है। जान्हवी पूरी हिम्मत से डाक्टरों के उस बयान पे फोकस करती हैं जिसमें दस फीसदी उम्मीद बताई गई है। वो प्रवीण को फोन करती हैं और तय करती हैं कि भाई को किसी भी तरह गुड़गांव के मशहूर मेदांता अस्पताल लेकर जाएंगी। एयर एंबुलेंस का इंतजाम होता है। साथ में प्रवीण के डाक्टर साढू हैं और जान्हवी। सवा घंटे में एयर एंबुलेंस दिल्ली लैंड होती है। इस बीच प्रवीण अपने संपर्कों से मेदांता में मरीज को आउट आॅफ टर्न अटेंड करने की व्यवस्था करते हैं। अगला फोन जहान्वी का आता है-प्रवीण में भाई को अपना लीवर डोनेट कर रही हूं। यहां 750 किमी दूर प्रवीण अपने बेट के साथ अकेले है। उनक ी आंखों में न जाने क्या-क्या तेरने लगता है। ठीक है तुम आगे बढ़ो, हम भी जल्दी आते हैं। प्रवीण को तत्काल कोई फ्लाइट नहीं मिलती। वे दिल्ली की ट्रेन पकड़ते हैं। जान्हवी ओटी में जा चुकी हैं। चलती ट्रेन में मेदांता के पांच डाक्टर प्रवीण की फोन लाइन पर हैं। उन्हें पति की कंसेट चाहिए। उधर से डाक्टर की आवाज आती है- लीवर डोनेट करने से इनकी जान जा सकती है, क्या आप तैयार हैं? जी मैं तैयार हूं।  इनके गुड़गांव पहुंचने के पहले दोनों ओटी में ले जाए चुके हैं।  इतनी जल्दी इसलिए की गई कि मरीज के पास टाइम बहुत कम था। जितनी देरी होती खतरा बढ़ता जाता। 14 घंटे बाद प्रवीण अपने बेटे के साथ जान्हवी को देख पाते हैं। जो बेसुध है। गले में न जाने कितने तार लगे हैं। अर्ध बेहोशी की हालत में प्रवीण बस उन्हें देखते रहते हैं। आपरेशन कामयाब रहा । तीन हफ्ते अस्ताल में रहना होगा । आगे कई साल तक नियम धरम से जीवन जीना होगा। क्या राखी के त्यौहार से एन पहले एक बहन का अपने भाई के लिए इससे बड़ा त्याग किसी ने देखा है। आपके जज्बे को सलाम, आप जल्द तंदुरुस्त रहें सूरमा की यही दुआ है।