दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की एक महिला प्रोफेसर की शिकायत पर संज्ञान लिया है. महिला प्रोफेसर का आरोप है कि मुस्लिम होने की वहज से उन्हें परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा है.

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने प्रोफेसर की शिकायत पर जेएनयू रजिस्टार को नोटिस और अंतरिम आदेश जारी किया है. महिला प्रोफेसर का आरोप है कि जेएनयू प्रशासन उनका उत्पीड़न कर रहा है. प्रोफेसर ने सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल एक्सक्लूजन एंड इनक्लूसिव के निदेशक पर भी उत्पीड़न का आरोप लगाया है. शिक्षक का आरोप है कि यह सब कुछ जेएनयू वीसी की मिली-भगत से हो रहा है.

प्रोफेसर का आरोप है कि अप्रैल 2019 से उनकी सैलरी रोक दी गई है और इसकी कोई कानूनी वजह भी नहीं बताई गई है. उन्हें क्लास नहीं दिया जा रहा है. साथ ही उन्हें पीएचडी और एम.फिल छात्रों का सुपरवाइजर भी नहीं बनाया जा रहा है. प्रोफेसर ने आरोप लगाया कि उन्हें बैठकों में बुलाया नहीं जाता है यहां तक कि उन्हें ऑफिशियल मेल और इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करने दिया जा रहा है.

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के मुताबिक प्रोफेसर का आरोप है कि जेएनयू की वेबसाइट पर उनका प्रोफाइल भी नहीं है. महिला प्रोफेसर इन सब वजहों से बहुत परेशान हैं और जेएनयू प्रशासन कैम्पस में स्थिति आवास को खाली करने का उन पर दबाव बना रहा है.

बता दें कि 2013 में जेएनयू ज्वॉइन करने से पहले प्रोफेसर स्थायी फैकल्टी के तौर पर हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में चार साल पढ़ा चुकी हैं. उन्होंने बताया कि पहले भी जेएनयू में उनकी सैलरी रोक दी गई थी और हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही उन्हें वेतन मिल पाया था. प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि कई छात्र उन्हें सुपरवाइजर चुनना चाहते हैं, लेकिन इच्छुक छात्रों पर दूसरे प्रोफेसरों को चुनने का दबाव डाला जा रहा है.

महिला प्रोफेसर का मानना है कि मुस्लिम होने की वजह से ही उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है. उनका आरोप है कि उन्हें जेएनयू से हटाने की साजिश रची जा रही है. दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के मुताबिक वह उत्पीड़न से इतना त्रस्त हो चुकी हैं कि कई बार आत्महत्या करने का उनके अंदर ख्याल आता है.

महिला प्रोफेसर की शिकायत के बाद दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने जेएनयू प्रशासन को नोटिस जारी किया है और 1 अगस्त तक जवाब मांगा है.