नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में बीते साल शहीद हुए औरंगजेब तो आपको याद ही होंगे. ईद मनाने के लिए अपने गांव जा रहे आरंगजेब की आतंकियों ने हत्या कर दी थी ताकि कश्मीर के युवा डरकर सेना में शामिल न हों. लेकिन आतंकियों की इस गफलत को दूर कर दिया औरंगजेब के ही दो भाईयों ने जिन्होंने भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का प्रण लिया है. औरंगजेब के भाई मोहम्मब शाबिर और मोहम्मद तारिक सेना में शामिल हो गए. इन दोनों भाइयों के फैसले की हर तरफ तारीफ हो रही है और वर्दी में इनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. लोग कह रहे हैं कि दोनों भाइयों ने सेना ज्वाइन कर आतंकियों के नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया.

सेना के पंजाब रेजीमेंट में शामिल हुए शाबिर और तारिक ने कहा कि हम भी अपने भाई की तरह अपने रेजिमेंट का नाम ऊंचा करेंगे और देश के लिए अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटेंगे. दोनों भाइयों ने यह भी ऐलान कर दिया कि वो आतंकियों से अपने बड़े भाई औरंगजेब की हत्या का भी बदला लेंगे.

आरंगजेब के बाद दोनों बेटों के सेना में शामिल होने पर उनके पिता हनीफ बेहद खुश दिखे. उन्होंने कहा , 'अगर मेरा बेटा लड़कर मरता तो मुझे कोई दुख नहीं होता लेकिन आतंकियों ने उसे धोखे से मारा. दोनों बेटों की भर्ती पर मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया है लेकिन दिल में दर्द भी है.' हनीफ ने कहा कि मेरा दिल करता है कि मैं खुद अपने बेटे की हत्या करने वाले दुश्मनों से लड़ूं लेकिन मुझे भरोसा है कि मेरे दोनों बेटे औरंगजेब की हत्या का बदला लेंगे.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के राजौरी में भारतीय सेना में 100 जवानों की भर्ती हुई है जिसमें औरंगजेब के दोनों भाई शामिल हैं. औरंगजेब के परिवार को देश सेवा विरासत में मिली है और उनके पिता मोहम्मद हनीफ भी सेना में अपनी सेवा दे चुके हैं. सेना की परीक्षा में करीब 11 हजार युवक शामिल हुए थे जिसमें 100 जवानों को अंतिम रूप से चुना गया.

44 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान रहे औरंगजेब की आतंकियों ने उस वक्त हत्या कर दी थी जब वो बीते साल 14 जून की सुबह राजौरी में ईद मनाने के लिए अपने गांव जा रहे थे. पुलवामा के कालम्पोरा से आतंकियों ने उनका अपहरण कर लिया था. बाद पुलिस ने औरंगजेब का शव कालम्पोरा से करीब 10 किलोमीटर दूर गुस्सु गांव में बरामद किया था. उनके सिर और गर्दन पर गोलियां मारी गई थीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहीद जवान की हत्या से पहले उन्हें टॉर्चर भी किया गया था. औरंगजेब सेना के बेहद बहादुर जवान थे और वो हिज्बुल आतंकी समीर को 30 अप्रैल 2018 को ढेर करने वाले मेजर रोहित शुक्ला की टीम में शामिल थे. जांबाज औरंगजेब ने कई बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया था.