नई दिल्ली: ऑटो सेक्टर में भारी मंदी है. बिक्री के आंकड़े 30-40 फीसदी तक गिर गए हैं. मंदी का यह सिलसिला अगर कायम रहा तो आने वाले दिनों में इस सेक्टर में लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर रोजगार का सबसे बड़ा साधन है और इसमें ऑटो सेक्टर का बड़ा योगदान है. इसके अलावा बीएस-6 मानकों के अनुपालन को लेकर ऑटो उद्योग का उत्पादन और घटने की संभावना बनी हुई है, जिसके फलस्वरूप इस क्षेत्र में काम करने वालों पर बेरोजगार होने का खतरा बना हुआ है. कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियों के तिमाही के नतीजे सामने आ चुके हैं और कुछ के आने बाकी है. इस रिपोर्ट में सुधार के संकेत नहीं दिख रहे हैं. ऑटो सेक्टर की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जुलाई महीने में मारुति की बिक्री 33.5% और M&M (महिंद्रा एँड महिंद्रा) की बिक्री 15% गिर गई.

उद्योग से जुड़े लोगों ने बताया कि GST की दर अधिक होने और कृषि क्षेत्र के संकटग्रस्त होने के साथ-साथ वेतन व मजदूरी में वृद्धि नहीं होने और लिक्विडिटी क्रंच (तरलता का संकट) रहने के कारण उद्योग में मांग में सुस्ती बनी हुई है, जिससे हर महीने बिक्री कम होती जा रही है. उधर, डीलरों के पास इन्वेंटरी बढ़ती जा रही है. इसके अलावा बीएस-4 मानक के बिना बिक्री के वाहनों के स्टॉक का प्रबंधन एक बड़ी समस्या बन गई है. 

ग्रांट थॉर्नटन इंडिया के पार्टनर श्रीधर वी. ने कहा कि यात्री वाहनों की बिक्री घटने से आगे उत्पादन में और कटौती हो सकती है. वी. श्रीधर ने कहा, "OEM (ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर) संचालन स्तर पर लागत को कम करने के रास्ते तलाश रहे हैं." उन्होंने कहा, "कठिन दौर से उबरने के लिए वे उत्पादन में कटौती का सहारा ले रहे हैं."

ऑटो उद्योग की बिक्री में गिरावट काफी मायने रखती है, क्योंकि देश के विनिर्माण क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर) के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इसका योगदान तकरीबन आधा है और GST से प्राप्त राजस्व में इसका योगदान 11 फीसदी है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (फिच ग्रुप) की सीनियर एनालिस्ट रिचा बुलानी ने बताया, "उपभोक्ता मांग में लंबे समय से नरमी रहने और डीलरों के पास इन्वेंटरी बढ़ने से OEM के लिए उत्पादन में कटौती करना आवश्यक हो गया है."