नई दिल्ली: ना सिर्फ आपके फोन या कंप्यूटर  को हैकिंग का खतरा है, बल्कि डीएसएलआर कैमरों की हैकिंग हो सकती है. सुरक्षा शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि डीएसएलआर कैमरोंपर भी रैनसमवेयर या मैलवेयर हमले हो सकते हैं. साइबर सुरक्षा कंपनी चेक प्वाइंट सॉफ्टवेयर टेक्नॉलजीज के शोधकर्ताओं ने पाया है कि आधुनिक कैमरे यूएसबी और वाईफाई से जुड़े होते हैं, ऐसे में हैकर्स उनके डेटा पर नियंत्रण प्राप्त कर सकते हैं.

चेक प्वाइंट सॉफ्टवेयर टेक्नॉलजीज के सुरक्षा शोधकर्ता इयाल इटकिन ने बताया, 'कोई भी स्मार्ट डिवाइस, जिसमें डीएसएलआर कैमरे भी शामिल है, हमले के लिए अत्यंत संवेदनशील हैं.' इटकिन ने कहा, 'कैमरे अब केवल यूएसबी से कनेक्ट नहीं हो रहे हैं, बल्कि वाईफाई नेटवर्क और संबंधित वातावरण से भी कनेक्ट हो रहे हैं. यह उन्हें हमलावरों की जद में पहुंचाता है.' अगर कैमरे पर हमला किया जाता है तो उसकी तस्वीरों को बंधक बनाया जा सकता है और बदले में फिरौती की मांग की जा सकती है.

चूंकि आधुनिक कैमरों में तस्वीरें फिल्म पर नहीं उतारी जाती है. इसलिए अंतर्राष्ट्रीय इमेजिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन ने एक मानक प्रोटोकॉल बनाया है, जिसे पिक्चर ट्रांसफर प्रोटोकॉल (पीटीपी) नाम दिया गया है, इसी के माध्यम से कैमरे से तस्वीरें पीसी पर ट्रांसफर की जाती है. हालांकि इस प्रोटोकॉल में मुख्य जोर तस्वीरों के ट्रांसफर पर ही है, लेकिन इसके माध्यम से कैमरों के फर्मवेयर अपडेट एक दर्जन कमांड दिए जाते हैं.

चेक प्वाइंट ने अपने रिसर्च के दौरान कैनन के ईओएस 80डी कैमरे पर काम किया और उसकी कमियों से कंपनी को अवगत कराया. इसके बाद कंपनी इसे सुधारने पर काम कर रही है. चूंकि अन्य कंपनियों के कैमरे भी इसी प्रोटोकॉल पर काम करते हैं. ऐसे में शोधकर्ताओं का कहना है कि उन कैमरों में भी ऐसी कमियां है, जिससे वे हैकरों की पहुंच में हैं.

इससे बचाव के लिए कैमरा मालिकों को अपने कैमरे को नवीनतम फर्मवेयर से अपडेट करना चाहिए, और अगर पैच उपलब्ध हो तो उसे इंस्टाल करना चाहिए. इसके अलावा जब इस्तेमाल में नहीं हो तो कैमरे का हाईफाई बंद कर देना चाहिए.