जन अधिकार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जताई थी नाराजगी

प्रशासनिक संवाददाता, भोपाल : सीएम हेल्पलाइन में आने वाली शिकायतों का त्वरित निराकरण करने वाले अफसरों को मिलने वाला इनाम बंद हो सकता है। इसकी जगह लापरवाह अफसरों पर एक्शन लेने की कार्रवाई तेज होगी। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसके संकेत जन अधिकार कार्यक्रम में अफसरों से चर्चा करते हुये दिये हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीएम हेल्पलाइन की शुरूआत की थी। इसमें आने वाली शिकायतों का निराकरण चार चरणों में करने का निर्णय लिया गया था। साथ ही व्यवस्था की गई कि जो अधिकारी शिकायतों का समय से पहले निराकरण करेगा उसे कोई इनाम दिया जायेगा। इसके पीछे तत्कालीन मुख्यमंत्री की मंशा थी कि शिकायतों को दूर करने में तेजी आयेगी। इस व्यवस्था को अब बंद करने की तैयारी है। कांग्रेस सरकार ने सीएम हेल्पलाइन का स्वरूप बदलकर जन अधिकार कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम अब हर माह के दूसरे मंगलवार को होगा। पहला कार्यक्रम जुलाई में हुआ था।

CM ने पूछा था चालू रखे या बंद कर दें
मुख्यमंत्री ने अपने पहले जन अधिकार कार्यक्रम में जिला, संभाग और विभाग प्रमुखों से पूछा था कि सीएम हेल्पलाइन कार्यक्रम को चालू रखा जाय या बंद कर दिया जाये। सीएम के प्रश्न का किसी अफसर ने जवाब नहीं दिया था। इसी बीच मामला आया कि शिकायतों का त्वरित निराकरण करने पर संबंधित अधिकारी को इनाम दिया जाता है। इस पर सीएम ने नाराजगी जताते हुये कहा था कि इनाम क्यों? सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों की संख्या बढ़ने का मतलब संबंधित विभाग का अधिकारी दोषी है। उनके खिलाफ एक्शन होना चाहिये। सीएम सचिवालय जन अधिकार कार्यक्रम को और सशक्त बनाने मंथन कर रहा है।

सबसे ज्यादा मामले रीवा में
प्रदेश में रीवा जिले में सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज हो रही हैं। टॉप फाइव जिलों में रीवा में490651, इंदौर 413380, सतना 364120, सागर 354371 और ग्वालियर में 344203 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।

तीन लाख से ज्यादा शिकायतें पेडिंग
सीएम हेल्पलाइन में हर दिन हजारों की संख्या में शिकायतें दर्ज हो रही हैं। योजना शुरू होने से अबतक 88 लाख 76 हजार 700 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें 85 लाख 73 हजार 181 शिकायतों का निराकरण करने का दावा पोर्टल के माध्यम से किया गया है। यानि अभी भी 3 लाख से अधिक शिकायतें निराकरण के इंतजार में हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय, नगरीय प्रशासन, जल संसाधन विभागों से संबंधित प्राप्त हो रही हैं। इनके निराकरण के लिये चार स्तर बनाये गये हैं। पहला जिला, दूसरा संभाग, तीसरा विभाग प्रमुख और चौथा शासन।