भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम को लेकर पुलिस मुख्यालय के प्रयास पिछले 31 साल से सफल नहीं हो पा रहे हैं। इस दौरान प्रदेश में अर्जुन सिंह से लेकर शिवराज सिंह चौहान तक 8 मुख्यमंत्री रहे, लेकिन इनमें से कोई भी सीएम पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करवाने में सफल नहीं हो सका। अब यह चुनौती मुख्यमंत्री कमलनाथ के पाले में आ गई है।

पवन वर्मा, भोपाल : इंदौर और भोपाल में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू किए जाने के लिए पहला प्रस्ताव ठीक 31 साल पहले बना था। तब से अब तक करीब एक दर्जन बार प्र्रस्ताव बनाए जा चुके हैं। सूत्रों की मानी जाए तो वर्ष 1988 में तत्कालीन डीजीपी एम नटराजन ने सबसे पहले इंदौर और भोपाल में पुलिस कमिश्नर सिस्टम को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजा था। इस वक्त अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री थे। हालांकि प्रस्ताव बनाने के कुछ दिनों बाद ही नटराजन की जगह पर बीके मुखर्जी प्रदेश के नए डीजीपी को गए थे। नटराजन ने प्रस्ताव में जो आशंका जताई थी, वह इस सिस्टम को लेकर आ रही अड़चन में सही साबित हो रही है। उस प्रस्ताव में उन्होंने उस वक्त बताया था कि ‘मध्य प्रदेश सहित बिहार, उत्तरप्रदेश राज्यों में कुछ नौकरशाहों ने अपने निहित स्वार्थों के कारण प्रशासनिक व्यवस्था में परिवर्तन के हर प्रयासों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया है।’ तीस साल पहले उनके द्वारा शासन को भेजे गए प्रस्ताव में जताई यह आशंका हाल ही में भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करवाने में आई अड़चन में दिखाई दी। पुलिस कमिश्नर सिस्टम की फाईल पीएचक्यू और मंत्रालय के पेंचों में उलझती दिखाई दे रही है।

यह रह चुके मुख्यमंत्री
फरवरी 1988 में यह प्रस्ताव अर्जुन सिंह के पास पहुंचा था। इनके बाद मोतीलाल वोरा, श्यामाचरण शुक्ल, सुंदर लाल पटवा, दिग्विजय सिंह, उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहे। इनमें से अर्जुन सिंह, दिग्विजय सिंह और शिवराज सिंह चौहान के समय कमिश्नर सिस्टम को लेकर कुछ मजबूत प्रयास हुए, लेकिन ये प्रयास भी सफल नहीं हो सके।

ये बताये थे आंकड़े
इस प्रस्ताव में वर्ष 1981 की दोनों शहरों की आबादी के साथ ही वर्ष 1991 और 1997 में अनुमानित आबादी का जिक्र किया गया था। इसमें दोनों शहरों की फ्लोटिंग जनसंख्या, दुर्घटनाओं की औसत संख्या, औसत गिरफ्तारियां, धरना, आंदोलन, अपराधों की संख्या आदि का जिक्र किया गया था। प्रस्ताव के वक्त दोनों शहरों के अपराधों की तुलना उस वक्त लागू हो चुके पुलिस कमिश्नर सिस्टम वाले शहरों के अपराधों से की गई थी। जिसमें कोयम्बटूर, कोच्चि, विशाखापट्नम, पुणे शहरों का जिक्र किया गया था।

यह सही है कि कांग्रेस के वचन पत्र में पुलिस कमिश्नर सिस्टम को लेकर वादा किया गया है। कानून व्यवस्था बेहतर रखना हमारी सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए जो भी सिस्टम बेहतर होगा हमारे मुख्यमंत्री उसके अनुसार अपडेट करते रहेंगे।