नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में छाई सुस्ती की वजह से पेट्रोलियम की डिमांड कम हो गई है. इसकी वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में लगातार गिरावट आई है. इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के रेट पर दिख रहा है. कीमतें लगातार गिर रही हैं. अगस्त महीने में अब तक पेट्रोल करीब 1 रुपये और डीजल करीब 80 पैसे प्रति लीटर तक सस्ता हुआ है. आखिरी बार पेट्रोल 31 जुलाई को महंगा हुआ था. इस महीने में अब तक पेट्रोल का रेट बढ़ा नहीं है.

दरअसल, आर्थिक सुस्ती की वजह से चीन, भारत, जर्मनी जैसे देशों में प्रोडक्शन पर काफी असर पड़ा है. प्रोडक्शन घटने से डिमांड भी कम हुआ है. आर्थिक सुस्ती के लिए चीन और अमेरिका के बीच जारी ट्रेड वार प्रमुख वजहों में एक है. हालांकि, सस्ता पेट्रोलियम भारत के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि भारत जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करता है. अगर इसकी कीमत बढ़ती है तो महंगाई तुरंत बढ़ने लगती है.

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस महीने अब तक कीमत में सात डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है. बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड का भाव 31 जुलाई को 65.17 डॉलर प्रति बैरल था, जबकि बीते कारोबारी सप्ताह के आखिरी सत्र में शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर बेंट क्रूड का अक्टूबर डिलीवरी वायदा अनुबंध 58.64 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. जानकारों का कहना है कि आर्थिक सुस्ती फिलहाल बनी रहेगी. इसलिए, पूरी संभावना है कि पेट्रोल-डीजल और सस्ता होगा.