हर लड़की की जिंदगी में कुछ ऐसी चीजें या बातें होती है, जिसे वो किसी के साथ शेयर नहीं कर पाती। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ बातों का कोई लॉजिक नहीं होता और सालों बाद तो बिल्कुल भी नहीं लेकिन ये बातें जिंदगीभर असर करती रहती हैं। आज भी लड़कियां जब पलट कर शादी शुरूआती दिनों को याद करती हैं तो अनकंफर्टेबल हो जाती है क्योंकि हर किसी की शादी के शुरूआती दिन असहज होते हैं। हालांकि धीरे-धीरे वो अपने ससुराल में एडस्ट कर ही लेती हैं लेकिन बावजूद इसके उनके मन में कुछ बातें या इच्छाएं रह जाती हैं, जो लाइफटाइम उन्हें सताती हैं।

जब बिना पूछे तय कर दी जाए शादी
पहले ही के समय में ही नहीं बल्कि आजकल भी कई बार पेरेंट्स बेटी से बिना पूछे उसकी तय शादी तय कर देते हैं। जब उनसे इसका कारण पूछा जाए तो वो कहते हैं कि तुम्हारी शादी की उम्र हो गई है। लड़कियां माता-पिता की खुशी के लिए शादी तो कर लेती हैं लेकिन उन्हें जिंदगीभर यह बात खटकती है, फिर चाहे वह अपने पति के साथ कितनी भी खुश क्यों ना हो।

जब शादी के बाद पहली बार हो ससुराल में एंट्री...
शादी तय होने से लेकर आखिर तक रस्में चलती ही रहती हैं। शादी हो जाने के बाद भी लड़कियों को ससुराल जाकर कई रस्में निभानी पड़ती है। मगर इस बीच कोई भी लड़की यह जानने की कोशिश नहीं करता कि क्या वो खुश है, क्या उसे थकावट तो नहीं? उसे किसी बात का डर तो नहीं? यो वो बातें हैं, जिसे लड़कियां ना तो किसी से शेयर कर पाती हैं और ना ही भूल पाती हैं।

फर्स्ट नाइट पर क्यों नहीं पूछी जाती मर्जी?
अरेंज मैरिज में लड़का-लड़की एक दूसरे को ठीक से नहीं जान पाते। वहीं दूसरी तरफ लड़कियों को शादी की थकावट होती है। इसी बीच वो संबंध बनाने की इच्छुक नहीं होती बल्कि अपने पति से बात करना चाहती है लेकिन पुरूषों को समझाना मुश्किल होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि लड़कियां इस टॉपिक पर खुलकर बात नहीं करती लेकिन पाटर्नर भी सुनना पसंद नहीं करते, खासकर भारतीय। मगर जब भी लड़कियां अपने फर्स्ट नाइट के इन दिनों को याद करती हैं तो वो अनकंफर्टेबल हो जाती हैं।

शादी के बाद जब बच्चे का हो प्रेशर
2-3 महीने तो दूर की बात है। नई बहू के घर में प्रवेश करते ही परिवार वाले लड़की पर प्रेशर बनाना शुरू कर देते हैं कि वो जल्दी उन्हें 'अच्छी खबर' (प्रेग्नेंसी की खबर) सुनाएं। मगर कोई यह जानने की कोशिश नहीं करता कि क्या वो इसके लिए तैयार है भी या नहीं। भले ही मां बनना हर औरत के लिए वरदान है लेकिन क्या उन्हें यह हक नहीं कि वो इसका फैसला खुद करें कि उन्हें कब मां बनना है।

भले ही शादी के बाद लड़कियां खुश हो लेकिन ये ऐसी बातें है जो वो ना तो किसी कह पाती हैं और ना ही उन्हें भुला पाती हैं। शादी के कई सालों बाद भी जब वो इन दिनों को याद करती हैं तो उन्हें सिर्फ असहजता ही महसूस होती है।