वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता में 1.3 अरब डॉलर की कटौती के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में सुधार आया है। पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी समूहों पर लगाम कसने की दिशा में पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने के लिए अमेरिका ने इस्लामाबाद को दी जाने वाली सुरक्षा मदद में कटौती की है। ट्रंप ने पिछले साल ऐलान किया था कि पाकिस्तान को दी जाने वाली 1.3 अरब डॉलर की सहायता राशि तब तक नहीं दी जाएगी जब तक पाकिस्तान अपने देश के अंदर आतंकवादियों की पनाहगाहों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है।

उन्होंने पिछले साल ट्वीट में कहा था कि अमेरिका पिछले 15 सालों से ‘मूर्खों' की तरह पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता दे चुका है लेकिन इसके बदले में ‘उसे झूठ तथा धोखा' मिला है। सितंबर में, ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय आतंकवादी समूहों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने पर इस्लामाबाद को दी जाने वाली 300 अरब डॉलर की सैन्य सहायता को रद्द कर दिया था।

ट्रंप ने रविवार को न्यूजर्सी के बेडमिनिस्टर में पत्रकारों से कहा कि उन्होंने पाकिस्तान को साल में दी जाने वाली मदद में 1.3 अरब डॉलर की कटौती की। कटौती करने के बाद, देश के साथ रिश्ते बेहतर हुए हैं। हमारे रिश्ते अच्छे हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान भी यहां यात्रा पर आए थे। खान पिछले महीने अमेरिका की यात्रा पर गए थे, जहां ट्रंप ने व्हाइट हाउस में उनसे मुलाकात की थी। ट्रंप ने खान के साथ बैठक के संदर्भ में कहा,‘ अब हमारे, पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्ते हैं। हमारी मुलाकात काफी अच्छी रही थी।'

उन्होंने कहा, ‘ उससे क्या हुआ? मैंने 1.3 अरब डॉलर सहायता की कटौती की। अब हमारे रिश्ते बेहतर हैं।' ट्रंप ने कहा कि किसी देश के साथ रिश्तों में विदेशी सहायता की मामूली अहमियत होती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने फलस्तीनियों को दी जाने वाली मदद में भी कटौती की है क्योंकि वे उनके देश के बारे में खराब बोलते हैं। ट्रंप ने कहा, ‘ हम एक साल में 500 अरब डॉलर दे रहे थे और अब कुछ नहीं दे रहे हैं।'

गौरतलब है कि अगस्त 2017 में अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया नीति के ऐलान के दौरान ट्रंप ने अफगानिस्तान में अमेरिकियों को मारने वालों को पनाह देने के लिए पाकिस्तान पर हमला बोला था और इस्लामाबाद को चेतावनी देते हुए कहा था कि आतंकवादियों को पनाह देने की ‘उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।'