नौकरशाहों से लेकर राजनेताओं तक से बेहतर तालमेल के साथ किया काम
भोपाल।
बाबूलाल गौर का नौकरशाहों से लेकर राजनेताओं तक से बेहतर तालमेल था। उन्होंने मुख्यमंत्री बनते ही तेज तर्राट आईएएस विजय सिंह को अपना मुख्य सचिव बनाया और बेहद ईमानदार आईएएस अफसर ओपी रावत उनके प्रमुख सचिव थे। मुख्यमंत्री और मंत्री रहते हुए उन्होंने अफसरों से काम लेना बखूबी सीखा था। अफसरों का बचाव वे यह कहकर करते थे कि हर अफसर हर काम नहीं कर सकता। वहीं अफसरों से वे कहा करते थे, हमे आप पर भरोसा है। छोटी-मोटी शिकायतों से घबराईएगा नहीं, वो सुनी तक नहीं जाएगी। गौर अफसर शाही के जरिए बढ़िया सरकार चलाना चाहते थे। वे केन्द्र से ज्यादा से ज्यादा पैसे लेकर राज्य में लगाना चाहते थे। उद्योगपति आते तो वे उनसे खुद मिलने पहुंच जाते थे।

उमाभारती के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जब 23 अगस्त 2004 को बाबूलाल गौर को मुख्यमंत्री बनाया गया तो उस समय बी के साहा मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव थे। उन्होंने एक अक्टूबर को तेज तर्राट आईएएस विजय सिंह को मध्यप्रदेश का मुख्यसचिव बनाया। गौर 29 नवंबर 2005 तक मुख्यमंत्री रहे इस दौरान पूरे समय विजय सिंह ने उनके साथ मुख्य सचिव के रुप में काम किया। विजय सिंह और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ओपी रावत के साथ बेहतर तालमेल बनाकर गौर ने अपनी कार्यशैली से प्रशासनिक अफसरों का दिल भी जीता और उनके जरिए प्रदेश के विकास के लिए कई प्रमुख योजनाओं और नीतियों का भी कार्यान्वयन किया। उनके मुख्यमंत्री रहते हुए अयोध्या बस्ती और गोकुल ग्राम जैसी योजनाएं शुरु की गई जो भारतीय संस्कृति और परंपराओं से उनका जुड़ाव दर्शाती है। केन्द्र में कांग्रेस सरकार के मंत्रियों यहां तक की केन्द्र में मंत्री रहे कमलनाथ से मिलकर भी गौर ने प्रदेश के विकास के लिए राशि लाने में काफी अच्छी भूमिका निभाई।

अभी तो मैं 84 साल का ही हूं...
अभी तो 84 साल ही हुए हैं...करीब पांच साल पहले अपने राष्टÑीय अध्यक्ष अमित शाह को अपनी उम्र इस अंदाज में गौर ने बताई थी। 14 सितम्बर 2014 को अमित शाह बिना पूर्व घोषित कार्यक्रम के भोपाल एयरपोर्ट पहुंचे थे। शाह से मिलने गौर भी पहुंचे। गौर उस वक्त प्रदेश के गृहमंत्री थे। शाह तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के साथ इंदौर से भोपाल आए थे। वीआईपी लाउंज में गौर का जैसे ही शाह से सामना हुआ, शाह ने बिना औपचारिकता निभाए पूछ लिया - ‘बाबूलाल जी कितनी उम्र हो गई आपकी’ शाह का यह पूछना था कि गौर हंसते हुए बोले- ‘सर, अभी तो 84 साल ही हुए हैं’। शाह ने जब यह सवाल किया तब लाउंज में तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता मौजूद थे।

बेटे का शव घर में रखा था और दुर्घटना में मरे 12 लोगों के परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंचे थे
बाबूलाल गौर जी अजातशत्रु थे। वे जितना सम्मान अपनी पार्टी के नेताओं का करते थे उतना ही सम्मान वे शेर-ए-भोपाल शाकिर अली खान का भी करते थे। भोपाल में मिल में काम करने के दौरान वे शाकिर साहब के नेतृत्व वाली ट्रेड यूनियन का हिस्सा थे। उनकी संवेदना का सबूत उस समय मिला जब उनके पुत्र का निधन हुआ और उनका शव घर में था, उसके बावजूद सूखी सेवनिया के पास रेल दुर्घटना में मारे गए 12 व्यक्तियों के परिवारों से मिलने वे गए। उन्हें मेरी और जिन संगठनों से में जुड़ा हुआ हूं। उनकी ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि।

अयोध्या बस्ती योजना
मध्यप्रदेश में गांवों के लिये लागू की गई गोकुल ग्राम प्रकल्प योजना की तर्ज पर ही शहरी झुग्गी बस्तियों के लिये अयोध्या बस्ती योजना प्रारंभ की गई थी। भोपाल में राहुल नगर-पंपापुर में प्रदेश की पहली अयोध्या बस्ती का लोकार्पण मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने 4 अक्टूबर 2004 को किया। अयोध्या बस्ती योजना के तहत झुग्गी बस्तियों में अच्छी सड़कों, नालियों, बिजली, साफ सफाई व जलापूर्ति की समुचित व्यवस्था राज्य शासन द्वारा की जाना थी।

वंदे मातरम गायन की शुरुआत - मुख्यमंत्री रहते बाबूलाल गौर ने ऐलान किया था कि सभी सरकारी कार्यालयों में एक जुलाई से प्रत्येक माह एक दिन राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का गायन होगा। राष्टÑीय गीत गायन कार्यक्रम आज भी निरंतर जारी है।

दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना - 25 सितम्बर 2004 को दीनदयाल अंत्योदय योजना शुरू हुई। अनुसचित जाति, जनजाति व गरीबी रेखा के नीचे जीवन यावन करने वाले परिवारों के लिये यह योजना बनी। योजना के तहत इन वर्गों के लोगों का इलाज शासन द्वारा अपने खर्च से कराये जाने का निर्णय लिया गया। एक वर्ष में प्रति परिवार अधिकतम 20 हजार रुपए की राशि शासन द्वारा व्यय की जाना थी।

गौर की साइकिल पर बैठकर नहाने जाते थे अटल - बाबूललाल गौर और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच जबरदस्त राजनीति संबंध के साथ दोनों अच्छे दोस्त भी थे। गौर, वाजपेयी को भाई साहब कहकर बुलाते थे। अटलजी जब भोपाल आते तो गौर के बरखेड़ी स्थित घर पर ही रुकते थे। दोनों के बीच घंटों कामकाज की बात के अलावा हंसी-मजाक भी होती थी। बताया जाता है कि अटलजी जब भी भोपाल आते थे, तो गौर की साइकिल पर पीछे बैठकर बड़े तालाब नहाने के लिए जाते थे। गौर ने एक इंटरव्यू में बताया भी था कि अटलजी उस समय बस और ट्रेन से अकेले ही दौरे करते थे। उनके बैग में दो-तीन जोड़ी कुर्ता और धोती रहती थीं। एक जोड़ी कपड़े वह तीन-चार दिन पहनते थे। मैं उन्हें नहलाने और कपड़े धुलवाने के लिए अपनी साइकिल से बड़े तालाब के घाट पर ले जाता था। गौर ने बताया था कि आधे रास्ते वो साइकिल चलाते और आधे रास्ते अटलजी साइकिल चलाते थे। घर से निकलने से पहले हम लोग कपड़े में गुड़ और चना बांध लेते थे। तालाब पर नहाने के बाद दोनों लोग गुड़ और चने खाते फिर वापस घर आ जाते थे।