30 दिन में रीडिंग नहीं तो सौ यूनिट के स्लैब की दशा में बढ़ी अवधि में नहीं लगेगा नया स्लैब

बृजेन्द्र मिश्रा, भोपाल: प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को बिजली कंपनियों के अफसरों और मीटर रीडरों की गलती का खामियाजा नहीं भुगतना होगा। इसके लिए राज्य सरकार यह प्रावधान करने जा रही है कि अगर तय समय अवधि एक माह में मीटर रीडिंग नहीं ली जाती तो उसके बाद की अवधि में बढ़ने वाली बिजली खपत की प्रति यूनिट की गणना उसी स्लैब में होगी, जिस स्लैब में सौ रुपए में सौ यूनिट बिजली देने का फैसला सरकार ने किया है। इसके माध्यम से सरकार बिजली कंपनी के अफसरों और कर्मचारियों पर नकेल भी कसने जा रही है।

राहत का गणित
अब तक बिजली कंपनियों के अफसरों की अनदेखी के चलते समय पर मीटर रीडिंग का काम नहीं हो पाता। कई बार कंपनियों द्वारा एक माह बाद रीडिंग दर्ज कराई जाती है और बिल में तारीख एक माह की ही डाल दी जाती है। अब ऐसा नहीं हो सकेगा। बिजली खपत की रीडिंग लेने आने वाले कर्मचारी के बिल देते समय उपभोक्ता यह देख सकेंगे कि पिछले माह की रीडिंग और इस माह की रीडिंग डेट में कितने दिन का अंतर है। अगर कंज्यूमर के मकान में लगे बिजली के मीटर की रीडिंग बिजली कंपनी तीस दिन बाद लेती है और उपभोक्ता की बिजली खपत का एक माह में स्लैब सौ रुपए में सौ यूनिट के दायरे में ही रहता है तो उसके बिल की गणना 100 से 150 या 151 से अधिक यूनिट के आधार पर नहीं की जाएगी। यह बिल एक रुपए यूनिट के हिसाब से ही तैयार किया जाएगा। इससे बिजली कंपनी की गलती की सजा कंज्यूमर को नहीं मिलेगी और उसका बिल खपत के आधार पर ही मिलेगा।

खपत अधिक तो फिर तय टैरिफ पर बिल
बिजली अफसरों के मुताबिक अगर किसी उपभोक्ता का बिल एक माह में 150 यूनिट तक के लिए तय किए गए स्लैब के आधार पर आता है तो उसे इसी आधार पर बिल जारी किए जाएंगे और 151 यूनिट से अधिक की खपत पर उसे इस योजना का कोई लाभ नहीं मिलेगा। कमलनाथ कैबिनेट द्वारा लिए गए इस फैसले को लेकर जल्द ही ऊर्जा विभाग आदेश जारी करने वाला है।