नई दिल्ली: आतंकी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने और धन शोधन पर निगरानी रखने वाली वैश्विक निगरानी संस्था ‘फिनांशियल एक्शन टास्क फोर्स' (एफएटीएफ) के एशिया-प्रशांत समूह ने पाकिस्तान को ईईएफयूपीएल (कालीसूची) में डाल दिया है। पाकिस्तान को ‘इन्हांस्ड एक्सपेडाइट फॉलो अप लिस्ट  में डालते हुए एशिया प्रशांत समूह  ने यह भी पाया कि पाकिस्तान ने धन शोधन और आतंकवाद के वित्त पोषण संबंधी 40 अनुपालन मानकों में से 32 का पालन नहीं किया।

एफएटीएफ एपीजी की बैठक ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में आयोजित की गई और शुक्रवार को समाप्त हुई बैठक में दो दिन में करीब सात घंटे से ज्यादा समय तक चर्चा चली। भारत एपीजी और एफएटीएफ दोनों का सदस्य है। इस बैठक में गृह, विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की टीम ने प्रतिनिधित्व किया। एपीजी में पाकिस्तान के कई मंत्रालयों की टीम का नेतृत्व स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर ने किया।

घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि एपीजे ने पाकिस्तान को मानकों पर खरा नहीं उतरने की वजह से ईईएफयू लिस्ट (काली सूची) में डाल दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद जैसे समूहों के वित्त पोषण को रोकने में विफल रहा है। पाकिस्तान के अनुपालन रिकॉर्ड की समीक्षा वाली कार्रवाई अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने पेश की।

आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराना और धन शोधन के 11 प्रभावी मानकों में से पाकिस्तान 10 में खरा नहीं उतर पाया। वहीं एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अब पाकिस्तान को अक्टूबर में काली सूची में जाने से बचने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अक्टूबर में एफएटीएफ की 27 बिंदू कार्ययोजना की समय-सीमा समाप्त हो जाएगी। यह लगभग निश्चित है कि पाकिस्तान एफएटीएफ की ‘काली सूची' में बना रहेगा और यह भी पूरी संभावना है कि एफएटीएफ की ‘काली सूची' में देश का दर्जा और घटेगा क्योंकि इसका अगला पूर्ण अधिवेशन अक्टूबर में पेरिस में होगा।

क्या है APG
बता दें कि एपीजी एशिया प्रशांत क्षेत्र में एफएटीएफ जैसी ही एक क्षेत्रीय संस्था है। यह क्षेत्र की सरकारों के बीच बनी संस्था है जिसकी स्थापना 1997 में की गई थी। एपीजी की आपसी मूल्यांकन प्रक्रिया हालांकि एफएटीएफ से अलग है लेकिन यह एफएटीएफ की 40 सिफारिशों के क्रियान्वयन पर ही आधारित होती है।