परिजनों की आंखों से बहती आंसुओं की धारा, पानी में बचने के लिए छटपटाते युवक की तस्वीर किसी भी पत्थर दिल की आंखें भिगोने के लिए काफी हैं। बड़े तालाब में विसर्जन के वक्त डूबी नांव में डूबे 11 युवकों की दास्तान सिलसिलेवार आई। हमारे यहां तो हादसों के बाद कार्रवाई का चलन है, लिहाजा अब कलेक्टर ने नांव से विसर्जन पर रोक लगा दी। बाकी हादसों के लिए बड़े अफसरों के बजाए छोटों पर ही कार्रवाई कर दी जाती है। अगले सफे पर नाव दुखांतिका उनवान के साथ बिलखती मांओं का फोटू अपनी कहानी खुद कह रहा है। जो बच्चे इस दुनिया से चल बसे उन सबके बारे में अब सिर्फ यही कहानी रह गई है। अब बहुत हो चुका विसर्जन को लेकर अब कोई नीति बनाने की आवश्यकता है।