पेंशन बोझ है तो इस बोझ को तोड़ा जाए, अब जो बूढ़ा हो उसे सन्यास पे छोड़ा जाए। बीच में सुनने में आया था खां...के सूबे के बुजुर्ग पत्रकारों की पेंशन में ईजाफा हो रिया हे। गोया के उनकी पेंशन सात से बढ़ा के दस हजार होने वाली हेगी। ये बढ़ोतरी तो खां दूर की बात, हकीकत इसके एकदम उलट हेगी। पता चला है कि पेंशनर पत्रकारों को गुजिश्ता दो महीने से पेंशन ही नहीं मिली है। हालांकि बजट वगैरह सब मंजूर हो चुका है। लगता है खां सरकार की मआली हालत इत्ती पतली चल्लई है कि बिचारे पेंशनर पत्रकारों को देने के लिए पइसा तक नहीं हेगा। आने वाला महीना तीज त्यौहारों का है। जाहिर है पेंशन से कुछ थोड़ा बहुत बघार तो लग ही जाता है। उम्मीद है सरकार इस मामले को संजीदगी से लेगी और बुजुर्ग पत्रकारों के हक में जल्द फैसला लेगी। उधर दैनिक भास्कर के होशंगाबाद एडिशन को आज 9 बरस पूरे हो गए। वहां आज नर्मदा नदी में बढ़ रहे प्रदूषण पर केन्द्रित विशेष अंक निकला है। इसमें इस पवित्र नदी से क्षमा याचना के साथ भेतरीन खबरें आई हैं। होशंबाद में यज्ञदत्त परसाई संपादक हैं जबकि सुधीर व्यास सिटी चीफ तो दीपेश सोनिया सिटी डेस्क इंचार्ज हैं। इस मौके पर आज शाम को शहर की एक राजस्थानी ढाणी में सभी पत्रकार अपने परिवार के साथ भोजन का आनंद लेंगे। मुबारक हो आप सबों को।